आर्यवीर दल का कार्य
सन् 1988 से अब तक भारत के विभिन्न प्रांतों में सैकड़ों शिविरों के माध्यम से आर्यवीर दल का कार्य।
07 लोग और संगठन
दर्शन योग महाविद्यालय में शिक्षित ब्रह्मचारी अरुणकुमार "आर्यवीर" 1988 से भारत के विभिन्न प्रांतों में वैदिक धर्म के प्रचार में संलग्न हैं।
सन् 1988 में मुंबई के पवई रामाश्रम में लगे आर्यवीर दल के एक शिविर के माध्यम से उनका आर्य समाज से परिचय हुआ और वे इससे जुड़े। स्व. कैप्टन देवरत्न आर्य तथा आर्य समाज खार के संस्थापक श्री ओमप्रकाश आर्य आदि के अर्थ सहयोग से उन्होंने एक माह तक आर्यवीर दल का प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर एक वर्ष तक मुंबई के विभिन्न स्थानों पर वीर दल की शाखाओं का गठन एवं प्रशिक्षण किया।
सन् 1988 से अब तक भारत के विभिन्न प्रांतों में सैकड़ों शिविरों के माध्यम से आर्यवीर दल का कार्य।
विभिन्न विषयों पर 45 से भी अधिक छोटी-बड़ी पुस्तकों का संपादन, प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।
लगभग 13 वर्षों तक पहले त्रैमासिक, फिर मासिक पत्रिका "सांतसा" का संपादन, प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।
ग्यारह ऑडियो कैसेटों और सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत का संगीतमय ध्वनि-मुद्रण। (विवरण नीचे)
विभिन्न गुरुकुलों में आर्ष क्रम से पढ़ने वाले छात्रों को वर्षों तक उदार श्रेष्ठियों से छात्रवृत्ति दिलवाई, जिनसे कई आचार्यों का निर्माण हुआ है, जो विभिन्न गुरुकुलों में अध्यापन आदि में संलग्न हैं।
दर्शन योग महाविद्यालय तथा वानप्रस्थ साधक आश्रम रोजड़ में लगने वाले योग शिविरों में प्रारंभ से अब तक लगातार क्रियात्मक ध्यान-योग का प्रशिक्षण। भारत के विभिन्न प्रांतों में वैदिक पद्धति से ध्यान-योग प्रशिक्षण शिविर।
गुरुकुल अध्ययनकाल में विभिन्न प्रांतों के पारायण यज्ञों में मंत्रपाठ तथा अनेक यज्ञों के संचालन का सौभाग्य। बाद में स्व. आचार्य ज्ञानेश्वर जी की शैली से अनेक स्थलों पर दैनिक यज्ञ प्रशिक्षण शिविरों में प्रशिक्षण।
15 से भी अधिक वर्षों से "सांतसा" नामक वेबसाइट तथा फ़ेसबुक आदि सोशल नेटवर्क साइटों के माध्यम से वैदिक सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार।
विगत आठ वर्षों से आर्ष तिथि पत्रक (सौर एवं चान्द्र मासों का पंचांगयुक्त कैलेंडर) का प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण।
विगत लगभग डेढ़ वर्षों से उनके द्वारा ध्वनि-मुद्रित 17 से भी अधिक श्रेष्ठ वैदिक पुस्तकों का वीडियोकरण तथा YouTube के माध्यम से प्रचार-प्रसार।
इसके अतिरिक्त अनेक अन्य कार्यों में संलग्नता।
दर्शन योग महाविद्यालय तथा वानप्रस्थ साधक आश्रम रोजड़ के योग शिविरों में प्रारंभ से अब तक क्रियात्मक ध्यान-योग का लगातार प्रशिक्षण, और भारत के विभिन्न प्रांतों में वैदिक पद्धति से ध्यान-योग प्रशिक्षण शिविर।
पारायण यज्ञों में मंत्रपाठ, अनेक यज्ञों का संचालन, और स्व. आचार्य ज्ञानेश्वर जी की शैली से अनेक स्थलों पर दैनिक यज्ञ प्रशिक्षण शिविर।
किशोर चरित्र निर्माण शिविरों में प्रशिक्षण, संचालन एवं आयोजन।
ग्यारह ऑडियो कैसेटों में अपने स्वर में आर्यवीर दल, युवा-चरित्र-निर्माण, ऋषि गाथा, ईशभक्ति के भजन, भारत गौरव गान, विवेक-वैराग्य श्लोक, संस्कृत गीतिकाएं तथा सुप्रसिद्ध आर्यवीर दल व्यायाम संगीत का निर्माण। इसके अतिरिक्त पंडित जयगोपाल विरचित सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत के ग्यारह समुल्लासों तक का लगभग 40 घण्टों में संगीतमय ध्वनि-मुद्रण, जिसके 5 समुल्लासों का लोकार्पण भी हुआ है। यह सब कार्य समाज में निःशुल्क वितरित किया गया है।
एंड्रॉयड तथा iOS फ़ोन के लिए "सांतसा" (Santasa) ऐप का निर्माण।
नीचे दिए गए कार्य भविष्य की योजनाएँ हैं। ये अभी पूर्ण नहीं हुए हैं।